ऑक्सीजन को लेकर केजरीवाल सरकार की मांग 14 राज्यों पर पड़ी भारी

जांच में हुए खुलासे के अनुसार, दिल्ली सरकार की ऑक्सीजन को लेकर अत्यधिक मांग से काफी लोगो को दिक्कतों का सामना करने पर विवश कर दिया, हालात ऐसे बन गए है की, 14 राज्यों के लोगो की जान पर आ पड़ी।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित ऑडिट टीम ने रिपोर्ट में कहा,

“भारी गड़बड़ी पकड़ी गई है। बेड कपैसिटी के आधार पर तय फॉर्म्युले के मुताबिक दिल्ली को 289 मिट्रिक टन ऑक्सिजन की जरूरत थी, लेकिन दिल्ली सरकार ने 1,140 मिट्रिक टन ऑक्सिनन की खपत का दावा किया था जो जरूरत से चार करीब गुना है।”

दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने 13 मई को दावा किया था कि दिल्ली के पास अतिरिक्त मात्रा में ऑक्सिजन है जो कि दूसरे राज्यों को दी जा सकती है।

और बताया था कि दिल्ली सरकार ने केंद्र को पत्र लिखकर कहा है कि उसके पास अतिरिक्त ऑक्सिजन है और इसे दूसरे राज्यों को भी दिया जा सकता है।

कोरोना की मार को झेल रहे लोग ऑक्सीजन की जरूरत में सरकार का मुँह ताक रहे थे इन जरूरतमंद लोगो में कितने ही लोग ऐसे है, जिनको अपनी जान ऑक्सीजन की कमी से गवानी पडी। बावजूद इसके भी केजरीवाल सरकार ने इन लोगो की परवाह किये बिना ही जरुरत से ज्यादा ऑक्सीजन की डिमांड कर 14 राज्यों को संकट में दाल दिया।

 

आखिर क्यों हुई ऑक्सीजन की इतनी कमी?

केजरीवाल सरकार ने गलत आकलन कर सरकार से अपनी आवश्यकता से 4 गुना ज्यादा ऑक्सीजन की मांग कर इतना स्टॉक मंगा लिया कि अन्य लोगो को ऑक्सीजन की मार सहनी पड़ी। इतनी जरुरत न होने पर भी दिल्ली के मुख्यमंत्री सरकार से लगातार ऑक्सीजन मांग कर रहे थे।

इतना ही नहीं दिक्कत इतनी बढ़ी की कई राज्यों की तरह उत्तर प्रदेश सरकार को भी 225 मीट्रिक टन ऑक्सीजन केंद्र से कम मिल पाई।

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